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What is Myopia ?How it is rectified (HINDI )?

निकटदृष्टि के दोष से ग्रसित आँख द्वारा बना प्रतिबिम्ब
निकटदृष्टि दोष (Myopia या shortsightedness) आँखों का वह दोष है जिसमें निकट की चीजें तो साफ-साफ दिखतीं हैं किन्तु दूर की चीजें नहीं। आंखों में यह दोष उत्पन्न होने पर प्रकाश की समान्तर किरणपुंज आँख द्वारा अपवर्तन के बाद रेटिना के पहले ही प्रतिबिम्ब बना देता है (न कि रेटिना पर) इस कारण दूर की वस्तुओं का प्रतिबिम्ब स्पष्ट नहीं बनता  (आउट ऑफ फोकस) और चींजें धुंधली दिखतीं हैं।
इस दोष में सड़क के पार लगे  पोस्टर ,दूकान आदिक का नाम आदि साफ़ दिखलाई नहीं देगा। उसे साफ़ साफ़ देखने के लिए उसके पास ही जाना पड़ेगा। 

निकटदृष्टि के दोष से ग्रसित आँख द्वारा बना प्रतिबिम्ब
जिन लोगों को दो मीटर या 6.6 फीट की दूरी के बाद चीजें धुंधली दिखती हैं, उन्हें मायोपिया का शिकार माना जाता है।एक सामान्य आँख को 

एक फ़ीट की दूरी (३० सेंटीमीटर )से लेकर अनंत दूरी तक की वस्तुएं साफ़ साफ़ दिखनी चाहिए। 

यहां एक फ़ीट की दूरी सामान्य आँख का 'निकट- बिंदु' (Near Point )है और अनंत दूरी 'दूर- बिंदु 'या Far Point है। 

मयोपिक आई -संरचना के हिसाब से भी दोष युक्त हो सकती है। निकट दृष्टि दोष से ग्रस्त आँख की आई -बॉल की लम्बाई सामान्य से ज्यादा हो जाती है। बालकों की उम्र बढ़ने पर आई बाल का बढ़ना स्वाभाविक है लेकिन इस दोष  में लम्बाई उम्र के बढ़ने के साथ कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती है। 

आँख के लेंस की वक्रता घुमाव या करवेचर भी ज्यादा हो सकता है जिसे हम आम भाषा में कह देते हैं आई लेंस की कॉन्वेजिटि ज्यादा होना  कह देते हैं। 
ऐसी दोष पूर्ण आँख के लिए दूर बिंदु अनंत न होकर दो ,पांच दस मीटर कुछ भी हो सकता है। इसे अवतल लेंस (concave )लेंस पहनकर ठीक किया जा सकता है। 

निकट दृषिट दोष का निवारण

निकट दृषिट दोष में नेत्र का दूर बिन्दु अनन्त से कम दूरी पर हो जाता है | इस दोष को दूर करने के लिए ऐसे अवतल लेंस(double concave lens ) का उपयोग किया जाता है ताकि अनंत दूरी  पर रखी वस्तु  से चलने वाली किरणें इस लेंस से निकलने पर नेत्र के दूर बिंदु  से चली हुई प्रतीत  हों  | तब ये किरणें नेत्र लेंस से अपवरतित(refrect ) होकर रेटिना पर मिलती हैं |
उपयुक्त फोकस दूरी वाले अवतल लेंस से युक्त चश्में के प्रयोग से निकटदृष्टि को सुधारा जाता है। इससे दूर की चीजें भी स्पष्ट दिखने लगती हैं।]] जब नेत्र की वक्रता (गोलाई ,घुमाव या curvature ) बढ़ जाती है तो उसका फोकस कम हो जाता है जिससे वस्तु का  प्रतिबिम्ब  रेटिना पर न बनकर उससे पहले ही बन जाता हैं।जिससे वस्तुये धुंधली  दिखाई देती हैं।


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