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पृथ्वी दिवस पर विशेष :शख्सियत : डेनिस एलन हायेस

शख्सियत : डेनिस एलन हायेस उन्तीस अगस्त उन्नीस सौ चौवालिस को अमरीका के विस्कॉन्सिन राज्य में जन्में डेनिस एलन हायेस हमारे वक्त के एक नामचीन पर्यावरण विज्ञानी एवं पर्यावरण पारिस्थितिकी एक्टिविस्ट हैं आपने अपना सारा जीवन मानव -पारितंत्र ,उद्योगिक पारिस्थितिकी के बारे में जागरूकता पैदा करने में लगा दिया है। आप पृथ्वी दिवस त्यौहार के सह -जन्मदाता हैं।आप वैकल्पिक ऊर्जा मामलों के माहिर हैं। आपने जिस महायज्ञ की शुरुआत की उसका ही  सहज प्रतिफल  था 'पृथ्वी दिवस'।बेशक इसके निमित्त बने एक अमरीकी सीनेटर।  पहला पृथ्वी पर्व २२ अप्रैल १९७० को मनाया गया। आज दुनियाभर  के तकरीबन एक सौ अस्सी मुल्क पृथ्वी के पर्यावरण ,पारितंत्रों ,हमारी हवा -पानी -मिट्टी की गुणवत्ता को बनाये रखने के महायज्ञ में अपनी -अपनी आहुति डाल रहें हैं तो इसका श्रेय आपको और सिर्फ आपको ही जाता है । अमरीकी  विश्वविद्यालयीय परिसरों में हमारी युवा भीड़ का ध्यान इस ओर  खींचने में आपका अप्रतिम योगदान रहा है। नारी विमर्श ,राजनीति आदि से युवा भीड़ को निकालकर पर्यावरण पारितंत्रों स...

What are antibody tests and what do they mean for the coronavirus pandemic?

https://edition.cnn.com/2020/04/14/health/antibody-test-explainer/index.html Dr. Fauci: Antibody tests are coming soon   08:09 (CNN) As the world watches and wonders when coronavirus pandemic stay-at-home orders and social distancing measures might end, some hope antibody tests might help provide a solution. Antibody tests -- also known as serology tests -- aren't meant to diagnose active infection with the coronavirus. Rather, they check for proteins in the immune system, known as antibodies, through a blood sample. Their presence means a person was exposed to the virus and developed antibodies against it, which may mean that person has at least some immunity -- although experts are not sure how strong the immunity may be or even how long it will last. 'Crappy' tests to check for past coronavirus infection are flooding the US, lab association says In contrast, diagnostic testing, so far, has mostly used a laboratory technique known as a polymerase...

Jamiat Ulema-e-Hind Moves SC, Says Tablighi Jamaat Event Being Used to ‘Demonise’ Muslim Community

The plea has sought directions to the Centre to stop dissemination of fake news and take strict action against the section of the media spreading bigotry and communal hatred in relation to the Nizamuddin Markaz issue. As the number of coronavirus-positive cases related the Tablighi Jamaat congregation in Delhi continued to rise, the Jamiat Ulema-e-Hind moved the Supreme Court seeking directions to the Centre to stop dissemination of "fake news" and take strict action against a section of the media for spreading communal hatred and bigotry. The plea filed by Jamiat Ulema-e-Hind and the secretary of its legal cell, through lawyer Ejaz Maqbool, contended that the unfortunate incident of the Tablighi Jamaat was being used to "demonise" and blame the entire Muslim community. At least 9,000 people had participated in the religious gathering at Tablighi Jamaat's headquarters in Nizamuddin West last month. The congregation became a key source for the spread of ...

Supreme court refuses to put CAA on hold

शाहीन बाग़ से संविधान -शरीफ का पाठ  :काठ का उल्लू बने रहने का कोई फायदा ? नगर -नगर डगर- डगर हर पनघट पर  पढ़ा जा रहा है :संविधान शरीफ। ताज़्ज़ुब यह है ये वही लोग  हैं  जो केवल और केवल  क़ुरान शरीफ (क़ुरआन मज़ीद ,हदीस )के अलावा और किसी को नहीं  मानते -तीन तलाक से लेकर मस्जिद में औरत के दाखिले तक। ये वही मोतरमायें हमारी बाज़ी और खालाएँ जो हाथ भर का बुर्क़ा काढ़ लेती हैं घर से पाँव बाहर धरने से पहले।   कैसे हैं ये खुदा के बन्दे जो जुम्मे की नमाज़ के फ़ौरन बाद हिंसा में मशगूल हो जाते हैं -नागरिकता तरमीम क़ानून के खिलाफ।  कितना कौतुक होता है जब तीन साल की बच्ची से कहलवाया जाता है :आज़ादी आज़ादी लेके रहेंगे आज़ादी ज़िन्ना वाली आज़ादी। इस बालिका को क्या इसके वालिद साहब और अम्मीजान तक को इल्म नहीं होगा जिन्ना आखिर कौन था फिर वह तो पाकिस्तान चला गया था। (आप लोग भी आज़ाद हैं वहां जाने के लिए ). सब जानते हैं बंटवारा देश का उसी ने करवाया था यह कहकर मुसलमान हिंदू भारत के साथ नहीं रह सकता है। कितने ही उनके साथ चले भी गए थे।  उनकी मृत्यु ...

महाभारत में कहा गया है : यन्न भारते !तन्न भारते !अर्थात जो महाभारत में नहीं है वह अन्यत्र भी नहीं है।ज़ाहिर है अभी जेनेटिक्स भी उन ऊंचाइयों को स्पर्श नहीं कर सकी हैं जो यहां वर्णित हैं

महाभारत में कहा गया है : यन्न भारते !तन्न भारते !अर्थात जो महाभारत में नहीं है वह अन्यत्र भी नहीं है।ज़ाहिर है अभी जेनेटिक्स भी उन ऊंचाइयों को स्पर्श नहीं कर सकी हैं जो यहां वर्णित हैं।    पुराणों में जो कहा गया है वह शुद्ध भौतिक विज्ञानों का निचोड़ भी हो सकता है ,सारतत्व भी। ज़रूरी नहीं है वह महज़ मिथ हो और चंद लेफ्टिए मिलकर उसका मज़ाक बनाते  उपहास करते फिरें । मसलन अगस्त्य मुनि को 'घटसम्भव' कहा गया है। 'कुंभज' और 'घटयौनि' भी 'कलशज :' भी ; एक ही अभिप्राय है इन  पारिभाषिक नामों का जिसका जन्म घड़े से कलश से हुआ है वही अगस्त्य है सप्तऋषि मंडल का शान से चमकने वाला कैनोपास (Canopus )ही अगस्त्य है जो लुब्धक (sirius)के बाद दूसरा सबसे चमकीला ब्राइट स्टार है।  गांधारी के बारे में कहा जाता है जब उसे पता चला कुंती एक बच्चे को उससे पहले जन्म देने वाली है (युधिष्ठिर महाराज ज्येष्ठ पांडव उस समय कुंती के गर्भ में ही थे )उसने ईर्ष्या वश अपने गर्भ में पल रहे भ्रूण के मुष्टि प्रहार से सौ टुकड़े कर दिए यही सौ कौरव बनकर आये। एक ही फर्टिलाइज़्द ह्यूमेन एग के मुष्टि प्रहार ...

कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना

कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना  एक अधीर रंजन जी हैं कौन सी पार्टी या दल के हैं हमें नहीं मालूम। बहरसूरत नेहरू कांग्रेस की सोनिया जी को इंगित करके कई लोग इधर पूछ रहें हैं इन्हें सोनिया जी ने कहाँ से पकड़ा। अपनी जिज्ञासा का शमन करने के लिए हमने इनके विषय में भारत धर्मी समाज के मुखिया आचार्य नंदलाल मेहता वागीश जी (विचारक एवं पूर्व में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के फेलो )से बात की तो उन्होंने बतलाया : अधीर रंजन नाम के किसी शख्स ने    पूर्व रक्षामंत्री  और वर्तमान केंद्रीय सरकार में वित्तमंत्री निर्मला सीता रमन के बारे में कहा है वह अबला हैं। ऐसा कहकर उन्होंने न सिर्फ महारानी रानीलक्ष्मी बाई ,ज्योतिबा फुले ,कस्तूरबा गांधी और  हीरा बेन का अपमान किया है दुर्गा की उपाधि से विभूषित इंदिरा प्रिय दर्शनी (नेहरू) गांधी को भी अपमानित किया है। लगता है अधीर की नज़र में फिलवक्त एक ही सबला है सोनिया मायनो उर्फ़ सोनिया गांधी। सोनिया जी यदि उनका गला भी पकड़ लें तो यकीन मानिये ये ज़नाब कहेंगे वाह क्या गला दबाया है गले में दर्द था ठीक हो गया।  ये ज़नाब आजकल उतने ...

विज्ञान का कृष्ण पक्ष :Cimate Emergency

 Climate Change a Myth and Or Realty ?    बिला शक जलवायु परिवर्तन हमारी हवा ,पानी और मिट्टी में मानवीयक्रियाकलापों (करतूतों और कुदरत के साथ किये गए हमारे सौतिया व्यवहार )द्वारा पैदा बदलाव की गवाही दृष्टा भाव से देखे जाने के साक्षी एकाधिक संस्थान सरकारी गैरसरकारी संगठन बन रहे हैं। इनमें शरीक हैं : (१ )इंटरगावरनमेंटल पैनल आन क्लाइमेट चेंज बोले तो जलावायु में आये बदलाव से सम्बद्ध  अंतर् -सरकारी (शासकीय) पैनल (२ )जैव वैविध्य और पारि -तंत्रीय सेवाओं से जुड़ा - इंटरगावरनमेंटल साइंस पॉलिसी प्लेटफॉर्म  (३ )जलवायु केंद्रीय जन-नीति  शोध संस्थान इत्यादि सभी ने समवेत स्वर एकराय से साफ -साफ़ माना है और बूझा भी है ,हमारा प्रकृति प्रदत्त पर्यावरण तंत्र  कुदरती (प्राकृत हवा पानी मिट्टी ) और तमाम पारितंत्र (इकोलॉजिकल सिस्टम्स )एक- एक करके लगातार दरकते -टूटते रहें हैं। इनके खुद को बनाये रखने ,साधे रहने की संतुलित बने रहने की कुदरती कूवत चुक गई है। इसी के चलते अनेक प्राणी -प्रजातियां अब विलुप्त प्राय : हैं कितनी ही अन्य प्रज...